प्रतापगढ़ किला – शिवाजी महाराज की रणनीति और पराक्रम का प्रतीक
प्रतापगढ़ किला महाराष्ट्र के सातारा जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला पर स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है। यह वही पवित्र भूमि है जहाँ 1659 ईस्वी में छत्रपति शिवाजी महाराज और अफज़ल ख़ान के बीच ऐतिहासिक भेट हुई थी। इस घटना ने मराठा स्वराज्य को स्थायी शक्ति प्रदान की और प्रतापगढ़ को भारतीय सैन्य इतिहास में अमर बना दिया।
प्रतापगढ़ का निर्माण स्वयं शिवाजी महाराज के आदेश पर किया गया था। यह दुर्ग रणनीतिक रूप से कोकण और दख्खन के मार्गों पर नियंत्रण रखने हेतु बनाया गया। घने जंगल, तीव्र ढलान और मजबूत तटबंदी इसे स्वाभाविक रूप से अभेद्य बनाते हैं।
1659 में बीजापुर सल्तनत ने अफज़ल ख़ान को शिवाजी महाराज को समाप्त करने भेजा। शिवाजी महाराज ने प्रतापगढ़ पर मुलाकात की योजना बनाई। यहां हुई ऐतिहासिक भेट में शिवाजी महाराज ने अपनी चतुर रणनीति और आत्मरक्षा कौशल से अफज़ल ख़ान का अंत किया। इस विजय ने मराठा साम्राज्य की प्रतिष्ठा को सम्पूर्ण भारत में स्थापित कर दिया।
किले पर भवानी माता मंदिर स्थित है। माना जाता है कि शिवाजी महाराज ने इसी देवी से आशीर्वाद प्राप्त कर स्वराज्य की रक्षा का संकल्प लिया। आज भी यहाँ तलवार के साथ भवानी माता की मूर्ति विराजमान है।
प्रतापगढ़ में शिवाजी महाराज की विशाल प्रतिमा, युद्ध स्मारक, बालेकिल्ला, तटबंदी और दरवाजे देखे जा सकते हैं। मानसून में यह किला हरियाली और बादलों से घिरा स्वर्गीय दृश्य प्रस्तुत करता है।
प्रतापगढ़ वह भूमि है जहाँ बुद्धि, साहस और रणनीति ने इतिहास की दिशा बदली।
प्रतापगड किल्ला – शिवरायांच्या पराक्रमाचा विजयस्तंभ
सातारा जिल्ह्यात सह्याद्री पर्वतरांगेत वसलेला प्रतापगड किल्ला मराठा इतिहासातील अत्यंत महत्त्वाचा दुर्ग आहे. १६५९ साली येथे छत्रपती शिवाजी महाराज आणि अफझलखान यांची ऐतिहासिक भेट झाली. या घटनेने स्वराज्याच्या यशाचा नवा अध्याय सुरू झाला.
प्रतापगडाची उभारणी शिवाजी महाराजांच्या आदेशाने झाली. कोकण आणि दख्खन यांमधील मार्गांवर नियंत्रण ठेवण्यासाठी हा किल्ला बांधण्यात आला. घनदाट जंगल, खोल दऱ्या आणि मजबूत तटबंदी यामुळे प्रतापगड नैसर्गिकरित्या अभेद्य आहे.
बीजापूर सल्तनतीचा सेनापती अफझलखान शिवाजी महाराजांना पकडण्यासाठी आला. प्रतापगडावर भेटीचे ठिकाण ठरले. येथे झालेल्या ऐतिहासिक प्रसंगात शिवाजी महाराजांनी आपल्या रणनितीने अफझलखानाचा अंत केला. या विजयामुळे मराठा साम्राज्य संपूर्ण भारतात प्रसिद्ध झाले.
किल्ल्यावर भवानी मातेचे मंदिर आहे. शिवाजी महाराजांनी भवानी मातेचे आशीर्वाद घेऊन स्वराज्य रक्षणाचा संकल्प केला अशी परंपरा आहे.
आज प्रतापगडावर शिवाजी महाराजांची भव्य मूर्ती, बालेकिल्ला, दरवाजे आणि युद्धस्मारक पाहायला मिळतात. पावसाळ्यात किल्ला ढगांमध्ये हरवलेला स्वर्ग वाटतो.
प्रतापगड म्हणजे पराक्रम, रणनिती आणि स्वराज्याची अजरामर निशाणी.
Pratapgad Fort – The Victory of Strategy and Courage
Pratapgad Fort, located in the Satara district of Maharashtra, is one of the most legendary forts in Indian history. It was here in 1659 that Chhatrapati Shivaji Maharaj confronted Afzal Khan in a historic encounter that changed the fate of the Maratha Empire. This event established Maratha power across the subcontinent and made Pratapgad a symbol of strategic brilliance.
The fort was constructed under Shivaji Maharaj’s supervision to control vital routes between the Konkan coast and the Deccan plateau. Dense forests, steep cliffs, and massive stone fortifications made it naturally secure and militarily superior.
Afzal Khan, a general of the Bijapur Sultanate, arrived to eliminate Shivaji Maharaj. A meeting was arranged at Pratapgad. Through intelligence, preparation, and tactical brilliance, Shivaji Maharaj overcame Afzal Khan in a decisive moment. This victory announced the rise of Swarajya to the world.
The Bhavani Temple inside the fort holds deep spiritual significance. It is believed that Shivaji Maharaj received blessings from Goddess Bhavani before embarking on his mission to establish self-rule.
Today, Pratapgad features a grand statue of Shivaji Maharaj, watchtowers, fort walls, gates, and war memorials. During monsoon, the fort is surrounded by mist and greenery, creating a breathtaking heritage landscape.
Pratapgad stands as an eternal monument to courage, intelligence, and the triumph of Swarajya.