रायगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक दुर्ग नहीं बल्कि भारतीय स्वाभिमान, स्वशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक है। सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला की ऊँचाइयों पर स्थित यह किला मराठा साम्राज्य की राजधानी रहा और यहीं से हिंदवी स्वराज्य की औपचारिक स्थापना हुई। 6 जून 1674 को इसी भूमि पर छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ जिसने भारतीय इतिहास की दिशा बदल दी।
रायगढ़ का प्राचीन नाम रैरी था। यह दुर्ग बहमनी और बाद में निज़ामशाही शासन के अधीन था। 1656 में शिवाजी महाराज ने इसे जीतकर अपनी भावी राजधानी के रूप में विकसित किया। मजबूत तटबंदी, प्रशासनिक इमारतें, अंबरखाना, जलसंग्रह व्यवस्था और मंदिरों का निर्माण हुआ। कुछ वर्षों में यह दुर्ग स्वराज्य का प्रशासनिक और सैन्य केंद्र बन गया।
6 जून 1674 को गंगासागर तालाब के समीप वैदिक विधि द्वारा शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक सम्पन्न हुआ। उन्हें ‘छत्रपति’ की उपाधि प्राप्त हुई। विदेशी सल्तनतों के युग में किसी हिंदू सम्राट का विधिवत राज्याभिषेक होना भारतीय आत्मगौरव का पुनर्जन्म था।
महादरवाजा, नगारखाना, बाजारपेठ, दरबार सभागृह, रानीवसा और जगदीश्वर मंदिर आज भी मराठा स्थापत्य की साक्षी हैं। यहाँ शिवाजी महाराज और महारानी सईबाई की समाधियाँ स्थित हैं। शिवजयंती और राज्याभिषेक दिवस पर लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
आज रायगढ़ महाराष्ट्र पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। रोपवे, ट्रेकिंग मार्ग और ऐतिहासिक अवशेष इसे जीवंत धरोहर बनाते हैं। रायगढ़ हमें नेतृत्व, आत्मनिर्भर शासन और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है।
रायगढ़ किला भारतीय आत्मा का सिंहासन है — स्वराज्य की अमर गाथा।
रायगड किल्ला – स्वराज्याची अमर राजधानी
सह्याद्री पर्वतरांगेतील रायगड किल्ला हा मराठा स्वराज्याचा आत्मा आहे. ६ जून १६७४ रोजी येथे छत्रपती शिवाजी महाराजांचा राज्याभिषेक झाला आणि हिंदवी स्वराज्याचा अधिकृत जन्म झाला. म्हणून रायगड हा महाराष्ट्राच्या अस्मितेचा सर्वोच्च शिखर मानला जातो.
रायगडाचे जुने नाव रैरी होते. १६५६ मध्ये शिवाजी महाराजांनी हा दुर्ग जिंकून त्याचा राजधानी म्हणून विकास केला. मजबूत तटबंदी, राजवाडे, अंबरखाना, बाजारपेठ आणि जलसाठे उभारले गेले. काही वर्षांत रायगड हा स्वराज्याचा प्रशासकीय आणि लष्करी केंद्रबिंदू बनला.
गंगासागर तलावाजवळ वैदिक विधींनी शिवाजी महाराजांचा राज्याभिषेक झाला. परकीय सत्तांच्या युगात हा हिंदू राज्याभिषेक भारतीय स्वाभिमानाचा ऐतिहासिक क्षण ठरला.
महादरवाजा, दरबार सभागृह, राणीवसा, जगदीश्वर मंदिर आणि शिवाजी महाराजांची समाधी आजही रायगडावर पाहायला मिळते. शिवजयंती व राज्याभिषेक दिनी लाखो भक्त येथे येतात.
आज रायगड हा पर्यटन, इतिहास अभ्यास आणि ट्रेकिंगसाठी प्रसिद्ध आहे. रोपवे सुविधेमुळे सर्व वयोगटातील लोक येथे पोहोचू शकतात.
रायगड म्हणजे स्वराज्याची जिवंत प्रेरणा आहे.
Raigad Fort – The Eternal Capital of Swarajya
Raigad Fort stands as the living heart of Maratha Swarajya. On 6 June 1674, Chhatrapati Shivaji Maharaj was crowned here, marking the formal birth of indigenous self-rule in India. Perched in the Sahyadri ranges, Raigad became the political, military and cultural center of the Maratha Empire.
Originally called Rairi, the fort was captured by Shivaji Maharaj in 1656. He transformed it into a grand capital with massive fortifications, royal courts, granaries, water reservoirs and temples. Within a short time, Raigad emerged as the administrative headquarters of Swarajya.
The coronation ceremony near the Ganga Sagar tank was conducted with full Vedic rituals. In an era dominated by foreign sultanates, the crowning of a Hindu emperor symbolized the revival of Indian self-respect.
Mahadarwaja, Darbar Hall, Queens’ Palace, Jagdishwar Temple and the samadhi of Shivaji Maharaj still stand as proud witnesses of Maratha engineering and governance. Every year, thousands gather here on Shiv Jayanti and Rajyabhishek day.
Today Raigad is a major heritage tourism destination. Ropeway access, trekking routes and panoramic views make it both a pilgrimage and adventure site.
Raigad Fort remains the eternal throne of Swarajya and Indian pride.