शिवनेरी किला महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर क्षेत्र में स्थित वह पवित्र दुर्ग है जहाँ 19 फरवरी 1630 को छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ। इसलिए शिवनेरी केवल एक किला नहीं, बल्कि मराठा स्वराज्य की जन्मभूमि और भारतीय आत्मगौरव का प्रथम दीपस्तंभ माना जाता है। सह्याद्रि पर्वत की गोद में स्थित यह दुर्ग प्राकृतिक सुरक्षा, जलस्रोतों और रणनीतिक स्थिति के कारण प्राचीन काल से महत्वपूर्ण रहा है।
शिवनेरी का इतिहास यादवकालीन युग तक जाता है। बाद में यह बहमनी और निज़ामशाही शासकों के अधीन रहा। जब शिवाजी महाराज की माता राजमाता जिजाऊ गर्भवती थीं, तब उन्हें सुरक्षित रखने हेतु इस दुर्ग पर लाया गया। यहीं बाल शिवाजी ने वीरता, नीति और धर्म की शिक्षा प्राप्त की। यही संस्कार आगे चलकर हिंदवी स्वराज्य के निर्माण का आधार बने।
दुर्ग की रचना अत्यंत सुदृढ़ है। सात मजबूत प्रवेशद्वार, ऊँची तटबंदी, गुप्त मार्ग और वर्षाजल संचयन प्रणाली इसे अभेद्य बनाती है। अंदर गंगा-जमुना जलकुंड, अंबा माता मंदिर और राजमाता जिजाऊ का कक्ष आज भी सुरक्षित हैं। शिवनेरी से जुन्नर और कोकण मार्गों पर नियंत्रण रखा जा सकता था, इसलिए यह सैन्य दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण था।
धार्मिक दृष्टि से शिवनेरी एक तीर्थ है। यहाँ शिवजयंती पर लाखों श्रद्धालु आते हैं। बाल शिवाजी की जन्मस्थली, माता जिजाऊ का निवास स्थान और अंबा भवानी मंदिर भक्तों के लिए विशेष आस्था के केंद्र हैं।
आज शिवनेरी किला महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक अध्ययन स्थलों में से एक है। ट्रेकिंग मार्ग, रोपवे सुविधा और संरक्षित विरासत इसे जीवंत धरोहर बनाते हैं।
शिवनेरी वह भूमि है जहाँ से स्वराज्य की पहली श्वास प्रारंभ हुई।
शिवनेरी किल्ला – स्वराज्याचा जन्मस्थळ
पुणे जिल्ह्यातील जुन्नरजवळ सह्याद्री पर्वतरांगेत वसलेला शिवनेरी किल्ला हा मराठा स्वराज्याचा जन्मस्थळ आहे. १९ फेब्रुवारी १६३० रोजी याच किल्ल्यावर छत्रपती शिवाजी महाराजांचा जन्म झाला. म्हणून शिवनेरी हा केवळ दुर्ग नसून महाराष्ट्राच्या अस्मितेचा पहिला दीपस्तंभ मानला जातो.
शिवनेरीचा इतिहास यादवकालापासून सुरू होतो. पुढे बहमनी व निजामशाहीच्या ताब्यात हा किल्ला होता. राजमाता जिजाऊंना सुरक्षित ठेवण्यासाठी त्यांना गर्भावस्थेत येथे आणले गेले. येथेच बाल शिवाजींना धर्म, नीती, शौर्य आणि नेतृत्वाचे संस्कार मिळाले.
किल्ल्याची तटबंदी, सात प्रवेशद्वार, पाण्याचे टाके, गुप्त मार्ग आणि मजबूत बुरुज यामुळे शिवनेरी अभेद्य मानला जात असे. अंबा भवानी मंदिर, गंगा-जमुना कुंड आणि राजमाता जिजाऊंचा निवास आजही पाहायला मिळतो.
शिवजयंतीच्या दिवशी लाखो शिवभक्त येथे येतात. शिवनेरी हे मराठा इतिहासाचे जिवंत तीर्थ बनले आहे.
आज शिवनेरी किल्ला ट्रेकिंग, पर्यटन आणि ऐतिहासिक अभ्यासासाठी प्रसिद्ध आहे. रोपवे सुविधेमुळे सर्व वयोगटातील लोक येथे पोहोचतात.
शिवनेरी म्हणजे स्वराज्याच्या उदयाची पवित्र भूमी.
Shivneri Fort – Birthplace of Chhatrapati Shivaji Maharaj
Shivneri Fort, located near Junnar in Pune district, is one of the most sacred heritage sites of India. It is the birthplace of Chhatrapati Shivaji Maharaj, born here on 19 February 1630. Because of this, Shivneri is not just a fort, but the spiritual starting point of Maratha Swarajya and Indian self-pride.
The origins of Shivneri trace back to the Yadava period, later controlled by Bahmani and Nizamshahi rulers. During her pregnancy, Rajmata Jijabai was brought here for safety. It was within these fort walls that young Shivaji received lessons in courage, ethics, leadership and devotion — the very foundations of Swarajya.
The fort is naturally protected by steep hills and reinforced by massive stone ramparts, seven fortified gateways, hidden escape paths and efficient rainwater harvesting tanks. Inside, the Ambabai Temple, Ganga-Yamuna water tanks and Jijabai’s residence remain preserved.
Religiously, Shivneri is a pilgrimage site. Every year on Shiv Jayanti, thousands of devotees climb the fort to honor the birthplace of their revered king.
Today, Shivneri Fort is a major heritage tourism destination offering trekking trails, ropeway access and breathtaking views of the Sahyadri landscape.
Shivneri stands as the sacred cradle from which Swarajya was born.