Sinhagad Fort
Sinhagad Fort
📍 Pune, Maharashtra

सिंहगढ़ किला – बलिदान और स्वराज्य का अमर स्मारक

सिंहगढ़ किला महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला पर स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है। यह किला मराठा इतिहास के सबसे प्रेरणादायक बलिदानों में से एक — वीर तानाजी मालुसरे के पराक्रम — के कारण अमर हो गया। 1670 ईस्वी में इसी किले को जीतने के लिए तानाजी ने अपने प्राण न्योछावर किए, और तभी से यह दुर्ग ‘सिंहगढ़’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

इस किले का प्राचीन नाम ‘कोंढाणा’ था। यह मुग़ल सेनाओं के नियंत्रण में था और पुणे क्षेत्र पर उनकी पकड़ बनाए रखने का प्रमुख केंद्र था। शिवाजी महाराज के लिए यह दुर्ग सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे पुणे और आसपास के प्रदेशों की सुरक्षा सुनिश्चित होती थी।

1670 में शिवाजी महाराज ने यह दुर्ग पुनः स्वराज्य में शामिल करने का निश्चय किया। इस अभियान का नेतृत्व वीर तानाजी मालुसरे को सौंपा गया। अत्यंत दुर्गम चट्टानों पर रात के अंधेरे में गोरपड (घोरपड छिपकली) की सहायता से दीवार चढ़कर मराठा सैनिकों ने किले में प्रवेश किया। भीषण युद्ध हुआ, जिसमें तानाजी वीरगति को प्राप्त हुए, परंतु किला जीत लिया गया। जब शिवाजी महाराज को यह समाचार मिला, उन्होंने कहा — “गड आला, पण सिंह गेला।” इसी वाक्य से किले को ‘सिंहगढ़’ नाम प्राप्त हुआ।

किले पर आज भी तानाजी मालुसरे की समाधि, कोंढणेश्वर मंदिर, मजबूत तटबंदी, दरवाजे और युद्ध स्मारक मौजूद हैं। यह दुर्ग मराठा सैन्य शौर्य और त्याग का जीवंत प्रतीक है।

सिंहगढ़ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। हर वर्ष शिवजयंती और तानाजी बलिदान दिवस पर हजारों श्रद्धालु यहाँ आते हैं।

आज सिंहगढ़ किला ट्रेकिंग, मानसून पर्यटन और ऐतिहासिक अध्ययन के लिए अत्यंत लोकप्रिय है। पुणे से निकट होने के कारण यह महाराष्ट्र का सबसे अधिक देखा जाने वाला दुर्ग है।

सिंहगढ़ वह भूमि है जहाँ स्वराज्य के लिए बलिदान ने अमरता पाई।