Hanuman · Chalisa · Hindi

Hanuman Mangal Chalisa

1. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
1. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
2. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
2. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
3. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
3. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
4. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
4. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
5. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
5. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
6. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
6. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
7. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
7. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
8. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
8. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
9. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
9. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
10. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
10. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
11. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
11. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
12. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
12. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
13. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
13. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
14. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
14. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
15. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
15. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
16. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
16. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
17. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
17. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
18. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
18. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
19. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
19. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥
20. जय हनुमान मारुति प्रभो, भक्तजनानुकम्पक।
20. मङ्गल भक्तिं देहि मे, हर दुःखं दारुणं क्षणात्॥

1. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
1. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
2. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
2. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
3. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
3. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
4. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
4. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
5. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
5. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
6. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
6. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
7. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
7. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
8. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
8. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
9. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
9. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
10. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
10. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
11. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
11. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
12. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
12. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
13. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
13. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
14. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
14. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
15. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
15. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
16. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
16. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
17. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
17. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
18. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
18. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
19. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
19. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।
20. जय हनुमान दयालु प्रभु, भक्तों के रखवाले।
20. मंगल कार्य और शुभ फल दो, हर लो भय और जंजालें।

1. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
1. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
2. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
2. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
3. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
3. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
4. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
4. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
5. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
5. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
6. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
6. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
7. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
7. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
8. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
8. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
9. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
9. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
10. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
10. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
11. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
11. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
12. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
12. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
13. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
13. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
14. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
14. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
15. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
15. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
16. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
16. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
17. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
17. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
18. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
18. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
19. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
19. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।
20. जय हनुमान दयाळू प्रभू, भक्तांचे रक्षणकर्ता।
20. मंगल कार्य आणि शुभ फल द्या, दूर करा संकटभारता।

Meaning

यह हनुमान चालीसा मंगल कार्य और शुभ फल के भाव से रचा गया है। इसमें भक्त भगवान के चरणों में नम्रता से प्रणाम करता है, कृपा मांगता है और अपने जीवन को धर्म, शांति और शुभ कर्म से जोड़ने की प्रार्थना करता है।

Benefits

श्रद्धा से पाठ करने पर साहस, भक्ति और संकट-निवारण की भावना मजबूत होती है। मंगल कार्य और शुभ फल के लिए यह पाठ उपयोगी माना जाता है। नियमित स्मरण से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और साधक में भक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है।