Shiva · Aarti · Hindi

Shiva Sandhya Aarti

जय जय शिव देव, जय महादेव देव।
दीपं गृहाण भक्त्या, कुरु मे शुभसेव॥
धूपदीपफलपुष्पैः पूजयामि पुनः पुनः।
सायं काले नाथ, रक्ष मां करुणानिधे॥
मङ्गलं ते महादेव, मङ्गलं भक्तवत्सल।
प्रसन्नो भव मे नित्यं, हर दुःखं सकलं मम॥

जय शिव देव, जय शिव देव।
भक्ति से दीप जलाऊं, चरणों में मन लगाऊं।
फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित करूं बारंबार।
संध्या आरती से जीवन हो उजियार।
कृपा करो प्रभु, दुख हर लो मेरे।
नाम तुम्हारा रहे मन में सवेरे-सवेरे।

जय शिव देवा, जय शिव देवा।
भक्तीचा दीप लावून चरणी मन अर्पू देवा।
फूल, धूप आणि नैवेद्य अर्पितो वारंवार।
संध्या आरतीने जीवन होवो उज्ज्वल साकार।
कृपा करा प्रभू, दुःख दूर करा।
तुमचे नाम मनात नित्य वसू द्या।

Meaning

यह शिव आरती संध्या-पूजन और मन की शांति के भाव से रचा गया है। इसमें भक्त भगवान के चरणों में नम्रता से प्रणाम करता है, कृपा मांगता है और अपने जीवन को धर्म, शांति और शुभ कर्म से जोड़ने की प्रार्थना करता है।

Benefits

श्रद्धा से पाठ करने पर शांति, वैराग्य और आंतरिक बल की भावना मजबूत होती है। संध्या-पूजन और मन की शांति के लिए यह पाठ उपयोगी माना जाता है। नियमित स्मरण से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और साधक में भक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है।