Hanuman Bhakti Stotra

Hanuman · Stotra · Hindi

Hanuman Bhakti Stotra

नमामि हनुमानं देवं, बलभक्तिप्रदं वीरम्।
भक्ति मनसा नित्यं, स्मरामि त्वां दयानिधे॥
त्वमेव शरणं नाथ, त्वमेव परमं बलम्।
भक्तानां हृदये नित्यं, प्रकाशो भव सर्वदा॥
दुःखक्षयकरं स्तोत्रं, श्रद्धया यः पठेन्नरः।
लभते मनसः शान्तिं, शुभं सौख्यं च विन्दति॥

मैं हनुमान प्रभु को प्रणाम करता हूं।
वे साहस, भक्ति और संकट-निवारण के दाता हैं।
श्रद्धा और समर्पण के लिए श्रद्धा से यह स्तुति की जाती है।
जो भक्त सच्चे मन से स्मरण करता है, उसके भीतर धैर्य, पवित्रता और सद्बुद्धि बढ़ती है।
प्रभु की कृपा से जीवन में मंगल, शांति और धर्म का प्रकाश आता है।

मी हनुमान प्रभूंना प्रणाम करतो।
ते धैर्य, भक्ती आणि संकट निवारण देणारे आहेत।
श्रद्धा आणि समर्पण यासाठी ही स्तुती श्रद्धेने केली जाते।
जो भक्त मनापासून स्मरण करतो, त्याच्या अंतःकरणात धैर्य, पावित्र्य आणि सद्बुद्धी वाढते।
प्रभूच्या कृपेने जीवनात मंगल, शांती आणि धर्माचा प्रकाश येतो।

Meaning

यह हनुमान स्तोत्र श्रद्धा और समर्पण के भाव से रचा गया है। इसमें भक्त भगवान के चरणों में नम्रता से प्रणाम करता है, कृपा मांगता है और अपने जीवन को धर्म, शांति और शुभ कर्म से जोड़ने की प्रार्थना करता है।

Benefits

श्रद्धा से पाठ करने पर साहस, भक्ति और संकट-निवारण की भावना मजबूत होती है। श्रद्धा और समर्पण के लिए यह पाठ उपयोगी माना जाता है। नियमित स्मरण से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और साधक में भक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है।