
Ganesh · Aarti · Hindi
Ganesh Pratah Aarti
जय जय गणेश देव, जय वक्रतुण्ड देव।
दीपं गृहाण भक्त्या, कुरु मे शुभसेव॥
धूपदीपफलपुष्पैः पूजयामि पुनः पुनः।
प्रातः काले नाथ, रक्ष मां करुणानिधे॥
मङ्गलं ते महादेव, मङ्गलं भक्तवत्सल।
प्रसन्नो भव मे नित्यं, हर दुःखं सकलं मम॥
जय गणेश देव, जय गणेश देव।
भक्ति से दीप जलाऊं, चरणों में मन लगाऊं।
फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित करूं बारंबार।
प्रातः आरती से जीवन हो उजियार।
कृपा करो प्रभु, दुख हर लो मेरे।
नाम तुम्हारा रहे मन में सवेरे-सवेरे।
जय गणेश देवा, जय गणेश देवा।
भक्तीचा दीप लावून चरणी मन अर्पू देवा।
फूल, धूप आणि नैवेद्य अर्पितो वारंवार।
प्रातः आरतीने जीवन होवो उज्ज्वल साकार।
कृपा करा प्रभू, दुःख दूर करा।
तुमचे नाम मनात नित्य वसू द्या।
Meaning
यह गणेश आरती दिन की पवित्र शुरुआत के भाव से रचा गया है। इसमें भक्त भगवान के चरणों में नम्रता से प्रणाम करता है, कृपा मांगता है और अपने जीवन को धर्म, शांति और शुभ कर्म से जोड़ने की प्रार्थना करता है।
Benefits
श्रद्धा से पाठ करने पर बुद्धि, शुभारंभ और विघ्न-विनाश की भावना मजबूत होती है। दिन की पवित्र शुरुआत के लिए यह पाठ उपयोगी माना जाता है। नियमित स्मरण से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और साधक में भक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है।
