
Ganesh · Aarti · Hindi
श्री गणेश वंदना – गाइये गणपति जगबंदन
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री गणेश वंदना (आरती/भजन) "गाइये गणपति जगबंदन" के पूर्ण बोल (Lyrics) इस प्रकार हैं:
गाइये गणपति जगबंदन।
संकर-सुवन भवानी-नंदन॥
सिद्धि-सदन, गज-बदन, बिनायक।
कृपा-सिंधु, सुंदर, सब-लायक॥
मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता।
बिद्या-बारिधि, बुद्धि-बिधाता॥
माँगत तुलसिदास कर जोरे।
बसहिं रामसिय मानस मोरे॥
अर्थ (भावार्थ):
-
पूरे संसार के वंदनीय, शिव और पार्वती के पुत्र श्री गणेश जी का गुणगान (वंदना) करें।
-
जो सिद्धियों के निवास स्थान हैं, जिनका मुख हाथी के समान है, जो कृपा के सागर, सुंदर और सभी कार्यों को करने में सक्षम हैं।
-
जिन्हें मोदक (लड्डू) बहुत प्रिय है, जो आनंद और मंगल प्रदान करने वाले हैं, तथा जो विद्या के विशाल समुद्र और बुद्धि देने वाले (विधाता) हैं।
-
अंत में गोस्वामी तुलसीदास जी हाथ जोड़कर यही वरदान माँगते हैं कि श्री राम और माता सीता मेरे मन (हृदय रूपी मंदिर) में सदा निवास करें।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री गणेश वंदना (आरती/भजन) "गाइये गणपति जगबंदन" के पूर्ण बोल (Lyrics) इस प्रकार हैं:
गाइये गणपति जगबंदन।
संकर-सुवन भवानी-नंदन॥
सिद्धि-सदन, गज-बदन, बिनायक।
कृपा-सिंधु, सुंदर, सब-लायक॥
मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता।
बिद्या-बारिधि, बुद्धि-बिधाता॥
माँगत तुलसिदास कर जोरे।
बसहिं रामसिय मानस मोरे॥
अर्थ (भावार्थ):
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पूरे संसार के वंदनीय, शिव और पार्वती के पुत्र श्री गणेश जी का गुणगान (वंदना) करें।
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जो सिद्धियों के निवास स्थान हैं, जिनका मुख हाथी के समान है, जो कृपा के सागर, सुंदर और सभी कार्यों को करने में सक्षम हैं।
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जिन्हें मोदक (लड्डू) बहुत प्रिय है, जो आनंद और मंगल प्रदान करने वाले हैं, तथा जो विद्या के विशाल समुद्र और बुद्धि देने वाले (विधाता) हैं।
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अंत में गोस्वामी तुलसीदास जी हाथ जोड़कर यही वरदान माँगते हैं कि श्री राम और माता सीता मेरे मन (हृदय रूपी मंदिर) में सदा निवास करें।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री गणेश वंदना (आरती/भजन) "गाइये गणपति जगबंदन" के पूर्ण बोल (Lyrics) इस प्रकार हैं:
गाइये गणपति जगबंदन।
संकर-सुवन भवानी-नंदन॥
सिद्धि-सदन, गज-बदन, बिनायक।
कृपा-सिंधु, सुंदर, सब-लायक॥
मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता।
बिद्या-बारिधि, बुद्धि-बिधाता॥
माँगत तुलसिदास कर जोरे।
बसहिं रामसिय मानस मोरे॥
अर्थ (भावार्थ):
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पूरे संसार के वंदनीय, शिव और पार्वती के पुत्र श्री गणेश जी का गुणगान (वंदना) करें।
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जो सिद्धियों के निवास स्थान हैं, जिनका मुख हाथी के समान है, जो कृपा के सागर, सुंदर और सभी कार्यों को करने में सक्षम हैं।
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जिन्हें मोदक (लड्डू) बहुत प्रिय है, जो आनंद और मंगल प्रदान करने वाले हैं, तथा जो विद्या के विशाल समुद्र और बुद्धि देने वाले (विधाता) हैं।
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अंत में गोस्वामी तुलसीदास जी हाथ जोड़कर यही वरदान माँगते हैं कि श्री राम और माता सीता मेरे मन (हृदय रूपी मंदिर) में सदा निवास करें।
Meaning
Sing the glories of Ganpati, who is revered by the entire world. The son of Shiva and Parvati. He is the abode of success, elephant-faced, the ocean of mercy, capable of everything. Tulsidas prays with folded hands: May Sita and Rama reside in my heart.
