वेद और पुराण: सनातन धर्म के 4 वेद और 18 महापुराण की सम्पूर्ण जानकारी

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वेद और पुराण
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वेद और पुराण: सनातन धर्म के शाश्वत ज्ञान-स्रोत

सनातन धर्म की आत्मा उसके शास्त्रों में निवास करती है। वेद श्रुति ग्रंथ हैं, जिन्हें दिव्य ज्ञान का मूल स्रोत माना जाता है। वहीं पुराण स्मृति ग्रंथ हैं, जो उस गूढ़ वैदिक ज्ञान को सरल कथा और इतिहास के माध्यम से जनमानस तक पहुँचाते हैं। भारतीय संस्कृति, परंपरा, संस्कार, पर्व-त्योहार और मंदिर पूजा – सबकी जड़ें वेद और पुराणों में हैं। यदि वेद बीज हैं, तो पुराण उस बीज से विकसित विशाल वटवृक्ष हैं।

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चार वेद – विस्तृत परिचय

वेद मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन और अपौरुषेय ग्रंथ माने जाते हैं। इन्हें ईश्वर द्वारा ऋषियों को श्रुति रूप में प्राप्त दिव्य ज्ञान कहा गया है। महर्षि वेदव्यास ने समाज के कल्याण हेतु वेदों को चार भागों में विभाजित किया – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। इन चारों वेदों में मंत्र, यज्ञ, दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा, संगीत और ब्रह्मज्ञान का अद्भुत समन्वय मिलता है।

1. ऋग्वेद

ऋग्वेद विश्व का सबसे प्राचीन ज्ञात ग्रंथ माना जाता है और वैदिक साहित्य की आधारशिला है। इसमें 10 मंडलों में 10,000 से अधिक मंत्र संकलित हैं, जिनमें अग्नि, इंद्र, वरुण, मित्र और सूर्य जैसे देवताओं की स्तुतियाँ की गई हैं। यह प्रकृति, ब्रह्माण्ड, सृष्टि-रचना और मानव जीवन के रहस्यों पर प्रकाश डालता है। वैदिक संस्कृति, यज्ञ परंपरा और देव उपासना की मूल जड़ें इसी वेद से विकसित हुई हैं।

2. यजुर्वेद

यजुर्वेद को कर्मकांड और यज्ञ विधि का मुख्य ग्रंथ कहा जाता है। इसमें हवन, बलि, दीक्षा, विवाह, गृहप्रवेश और राजसूय यज्ञ जैसे वैदिक अनुष्ठानों की संपूर्ण विधियाँ दी गई हैं। इसके दो प्रमुख स्वरूप हैं – शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद। आज भी मंदिरों में होने वाली पूजा और वैदिक संस्कारों की प्रक्रिया इसी वेद पर आधारित है।

3. सामवेद

सामवेद को संगीत और भक्ति का वेद कहा जाता है। इसमें ऋग्वेद के मंत्रों को विशेष सुरों में गाने की विधि बताई गई है। भारतीय शास्त्रीय संगीत, भजन, कीर्तन और संकीर्तन परंपरा का मूल स्रोत यही वेद है। यह ध्वनि, लय और स्वर के माध्यम से आत्मा और परमात्मा के बीच मधुर संबंध स्थापित करता है।

4. अथर्ववेद

अथर्ववेद को जनजीवन और व्यवहारिक ज्ञान का वेद कहा जाता है। इसमें रोग निवारण, स्वास्थ्य रक्षा, गृहस्थ जीवन, समाज व्यवस्था, शांति मंत्र और रक्षा-कवचों का वर्णन है। आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र और मनोविज्ञान के प्रारंभिक संकेत भी इसमें मिलते हैं। यह वेद आध्यात्म और दैनिक जीवन के संतुलन का अद्भुत उदाहरण है।

वेदों की आंतरिक संरचना

प्रत्येक वेद चार भागों में विभाजित है – संहिता (मंत्र), ब्राह्मण (यज्ञ विधि), आरण्यक (वन-चिंतन) और उपनिषद (ब्रह्मज्ञान)। उपनिषदों से ही वेदांत दर्शन का जन्म हुआ, जो भारतीय आध्यात्मिक चिंतन की सर्वोच्च धारा मानी जाती है।

वेदों की संरचना

प्रत्येक वेद चार भागों में विभाजित है – संहिता (मंत्र), ब्राह्मण (यज्ञ विधि), आरण्यक (वन-चिंतन) और उपनिषद (ब्रह्मज्ञान)। उपनिषदों से ही वेदांत दर्शन का जन्म हुआ, जो भारतीय आध्यात्मिक चिंतन की सर्वोच्च धारा है।

पुराण क्या हैं?

पुराणों को स्मृति ग्रंथ कहा जाता है। इनमें सृष्टि रचना, देवताओं की लीलाएँ, अवतार कथाएँ, तीर्थ महिमा, व्रत परंपरा और राजवंश इतिहास वर्णित है। पुराणों ने वैदिक ज्ञान को सरल भाषा में समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया। इन्हें पंचलक्षण ग्रंथ कहा गया है – सृष्टि, प्रलय, देव वंश, मन्वंतर और राजवंश।

18 महापुराण – संक्षिप्त सारणी

क्रम महापुराण प्रमुख देवता मुख्य विषय विशेष पहचान
1 ब्रह्म पुराण ब्रह्मा सृष्टि रचना आदि सृष्टि वर्णन
2 पद्म पुराण विष्णु भक्ति, तीर्थ तीर्थ महिमा ग्रंथ
3 विष्णु पुराण विष्णु दशावतार वैष्णव दर्शन आधार
4 शिव पुराण शिव शिव लीला ज्योतिर्लिंग कथा
5 भागवत पुराण कृष्ण कृष्ण लीला भक्ति योग ग्रंथ
6 नारद पुराण विष्णु भक्ति साधना कीर्तन परंपरा
7 मार्कण्डेय पुराण देवी शक्ति उपासना दुर्गा सप्तशती
8 अग्नि पुराण अग्नि यज्ञ, आयुर्वेद ज्ञानकोषीय
9 भविष्य पुराण विविध कलियुग वर्णन भविष्य कथन
10 ब्रह्मवैवर्त पुराण कृष्ण राधा-कृष्ण लीला प्रेम भक्ति
11 लिंग पुराण शिव शिव तत्त्व शिवलिंग विधान
12 वराह पुराण विष्णु वराह अवतार पृथ्वी उद्धार
13 स्कंद पुराण कार्तिकेय तीर्थ महिमा सबसे बड़ा पुराण
14 वामन पुराण विष्णु वामन अवतार बलि कथा
15 कूर्म पुराण विष्णु समुद्र मंथन सृष्टि रहस्य
16 मत्स्य पुराण विष्णु प्रलय कथा वेद रक्षा
17 गरुड़ पुराण विष्णु परलोक ज्ञान श्राद्ध विधान
18 ब्रह्माण्ड पुराण देवी ब्रह्माण्ड रचना ललिता सहस्रनाम

 

18 महापुराण – 4 से 5 पंक्तियों में परिचय

1. ब्रह्म पुराण

ब्रह्म पुराण सृष्टि की आदि रचना और ब्रह्मा जी की उत्पत्ति का वर्णन करता है। इसमें लोकों, पर्वतों, नदियों और तीर्थों की महिमा बताई गई है। धर्म, दान और व्रत की महत्ता का विस्तार से उल्लेख मिलता है। इसे प्राचीनतम पुराणों में स्थान प्राप्त है।

2. पद्म पुराण

पद्म पुराण भगवान विष्णु की भक्ति और वैष्णव परंपरा का प्रमुख ग्रंथ है। इसमें तीर्थ यात्रा, व्रत, पूजा और धार्मिक आचरण का विस्तृत वर्णन है। गंगा और पुष्कर तीर्थ की महिमा विशेष रूप से बताई गई है। यह भक्ति मार्ग को सुदृढ़ करता है।

3. विष्णु पुराण

विष्णु पुराण में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनकर्ता बताया गया है। इसमें दशावतार की विस्तृत कथा मिलती है। राजवंशों, धर्मराज्य और सामाजिक व्यवस्था का सुंदर चित्रण किया गया है। यह वैष्णव दर्शन का आधार ग्रंथ है।

4. शिव पुराण

शिव पुराण भगवान महादेव की लीलाओं और शिवतत्त्व का वर्णन करता है। इसमें ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति, शिव-पार्वती विवाह और गणेश जन्म की कथाएँ हैं। शैव परंपरा का यह सर्वोच्च ग्रंथ माना जाता है। शिव भक्ति का पूर्ण मार्गदर्शन इसमें मिलता है।

5. भागवत पुराण

भागवत पुराण श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का अमृतमय ग्रंथ है। इसमें भक्ति योग को सर्वोच्च साधना बताया गया है। वृंदावन लीला, रासलीला और गीता तत्व का सुंदर वर्णन है। आज भी भागवत कथा भक्ति परंपरा का केंद्र है।

6. नारद पुराण

नारद पुराण भक्ति, कीर्तन और वैष्णव साधना का ग्रंथ है। इसमें नारद जी द्वारा दिए गए धर्म उपदेश मिलते हैं। तीर्थ महिमा और व्रत कथाओं का भी वर्णन है। यह भक्तिमार्ग का मार्गदर्शक ग्रंथ है।

7. मार्कण्डेय पुराण

मार्कण्डेय पुराण शक्ति उपासना का प्रमुख ग्रंथ है। इसमें दुर्गा सप्तशती (देवी महात्म्य) का प्रसिद्ध वर्णन मिलता है। देवी के विविध स्वरूपों और असुर संहार की कथाएँ इसमें हैं। शाक्त परंपरा का यह मूल आधार ग्रंथ है।

8. अग्नि पुराण

अग्नि पुराण यज्ञ, पूजा, आयुर्वेद, वास्तु और धनुर्वेद का ज्ञान प्रदान करता है। यह धार्मिक ग्रंथ के साथ-साथ ज्ञानकोष भी है। इसमें शासन व्यवस्था और युद्ध नीति तक का उल्लेख मिलता है। इसे ज्ञानकोषीय पुराण कहा जाता है।

9. भविष्य पुराण

भविष्य पुराण में कलियुग की सामाजिक और धार्मिक स्थिति का वर्णन है। इसमें भविष्य में होने वाली घटनाओं और राजवंशों का उल्लेख मिलता है। यह इतिहास और भविष्य कथन का अनोखा संगम है।

10. ब्रह्मवैवर्त पुराण

इस पुराण में राधा-कृष्ण की प्रेममयी लीलाओं का सुंदर वर्णन है। वैष्णव भक्ति और प्रेम मार्ग की विशेष व्याख्या इसमें मिलती है। यह राधा उपासना का मुख्य ग्रंथ माना जाता है।

11. लिंग पुराण

लिंग पुराण शिवलिंग की उत्पत्ति और पूजा विधि का वर्णन करता है। इसमें शिवतत्त्व और ब्रह्मज्ञान की व्याख्या है। शिव भक्तों के लिए यह अत्यंत पवित्र ग्रंथ है।

12. वराह पुराण

वराह पुराण में भगवान विष्णु के वराह अवतार द्वारा पृथ्वी उद्धार की कथा है। इसमें धर्म रक्षा और अवतार तत्त्व का सुंदर वर्णन मिलता है। यह वैष्णव परंपरा का महत्वपूर्ण ग्रंथ है।

13. स्कंद पुराण

स्कंद पुराण सभी पुराणों में सबसे बड़ा है। इसमें भगवान कार्तिकेय की लीलाएँ और भारत के हजारों तीर्थों की महिमा वर्णित है। मंदिर परंपरा और तीर्थ संस्कृति का यह विशाल ज्ञानकोष है।

14. वामन पुराण

वामन पुराण में भगवान विष्णु के वामन अवतार और बलि राजा की कथा है। इसमें अहंकार नियंत्रण और धर्म विजय का संदेश दिया गया है। यह अवतार लीला का प्रेरणादायक ग्रंथ है।

15. कूर्म पुराण

कूर्म पुराण में समुद्र मंथन और अमृत प्राप्ति की कथा है। इसमें सृष्टि रहस्य और धर्मशास्त्र का विवेचन मिलता है। यह वैष्णव दर्शन का महत्वपूर्ण ग्रंथ है।

16. मत्स्य पुराण

मत्स्य पुराण में प्रलय और नवसृष्टि की कथा है। भगवान विष्णु द्वारा वेदों की रक्षा का वर्णन मिलता है। मंदिर वास्तु और मूर्ति निर्माण की विधियाँ भी इसमें दी गई हैं।

17. गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा और कर्मफल का वर्णन करता है। श्राद्ध, पिंडदान और परलोक विधान इसमें विस्तार से बताया गया है। यह जीवन और मृत्यु का आध्यात्मिक मार्गदर्शक है।

18. ब्रह्माण्ड पुराण

ब्रह्माण्ड पुराण में सृष्टि, ग्रह-नक्षत्र और कालचक्र की रचना का वर्णन है। प्रसिद्ध ललिता सहस्रनाम इसी पुराण में है। यह देवी उपासना और ब्रह्माण्ड ज्ञान का अद्भुत ग्रंथ है।


वेद ज्ञान के महासागर हैं और पुराण उस ज्ञान की जीवनदायिनी धाराएँ। दोनों मिलकर सनातन धर्म की आत्मा को जीवंत रखते हैं। ये ग्रंथ केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, कर्म और मोक्ष के मार्ग पर ले जाने वाले शाश्वत प्रकाश स्तंभ हैं।

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राज पिछले 20 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे हैं। इनको SEO और ब्लॉगिंग का अच्छा अनुभव है। इन्होने एंटरटेनमेंट, जीवनी, शिक्षा, टुटोरिअल, टेक्नोलॉजी, ऑनलाइन अर्निंग, ट्रेवलिंग, निबंध, करेंट अफेयर्स, सामान्य ज्ञान जैसे विविध विषयों पर कई बेहतरीन लेख लिखे हैं। इनके लेख बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं। Founder Of Moonfires.com
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