विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः |
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते ||२-५९||
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते ||२-५९||
viṣayā vinivartante nirāhārasya dehinaḥ .
rasavarjaṃ raso.apyasya paraṃ dṛṣṭvā nivartate ||2-59||
rasavarjaṃ raso.apyasya paraṃ dṛṣṭvā nivartate ||2-59||
।।2.59।। निराहारी (इन्द्रियोंको विषयोंसे हटानेवाले) मनुष्यके भी विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, पर रस निवृत्त नहीं होता। परन्तु इस स्थितप्रज्ञ मनुष्यका तो रस भी परमात्मतत्त्वका अनुभव होनेसे निवृत्त हो जाता है।
