हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है। सम्पूर्ण सृष्टि का संचालन सूर्य ऊर्जा से होता है। रथ सप्तमी का पर्व सूर्य देव की आराधना, स्वास्थ्य, तेज, यश और दीर्घायु प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव अपने सप्त अश्वों वाले रथ पर आरूढ़ होकर उत्तरायण गति में आगे बढ़ते हैं। इसी कारण इस दिन को रथ सप्तमी कहा जाता है।
📜 रथ सप्तमी की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार, राजा यशोवर्मा के पुत्र को असाध्य रोग हो गया था। ऋषियों ने उसे रथ सप्तमी के दिन प्रातः सूर्य देव को अर्घ्य देने का विधान बताया। बालक ने श्रद्धापूर्वक सूर्य उपासना की और रोगमुक्त हो गया। तभी से यह दिन आरोग्य और रोग नाशक पर्व माना गया।
🚩 धार्मिक महत्व
• सूर्य देव को नवग्रहों का राजा कहा गया है
• यह दिन आरोग्य सप्तमी भी कहलाता है
• इस दिन सूर्य उपासना से नेत्र रोग, त्वचा रोग और दुर्बलता दूर होती है
• यह पर्व मकर संक्रांति के बाद आने वाला प्रथम सूर्य पर्व है
• रथ सप्तमी से ही सूर्य की पूर्ण उत्तरायण गति प्रारंभ मानी जाती है
🌅 प्रातःकाल स्नान का विशेष विधान
शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
दक्षिण भारत में आज भी अरुणोदय स्नान की परंपरा प्रचलित है।
स्नान मंत्र:
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति ।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥
☀️ सूर्य देव को अर्घ्य देने की विधि
• तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत डालें
• सूर्योदय के समय सूर्य की ओर मुख करके जल अर्पित करें
• जल की धारा के मध्य से सूर्य को देखें
अर्घ्य मंत्र:
ॐ सूर्याय नमः ।
ॐ आदित्याय नमः ।
ॐ भास्कराय नमः ॥
📖 रथ सप्तमी का वैदिक श्लोक
ऋग्वेद से सूर्य स्तुति:
उद्यन्नद्य मित्रमह आरोहन्नुत्तरा दिवम् ।
हृद्रोगं मम सूर्य हरिमाणं च नाशय ॥
अर्थ:
हे सूर्य देव! उदय होकर मेरे हृदय रोग और शरीर की दुर्बलता को नष्ट करें।
🛕 विशेष पूजन विधि
-
प्रातः स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें
-
सूर्य यंत्र या प्रतिमा स्थापित करें
-
रोली, अक्षत, लाल पुष्प अर्पित करें
-
गुड़, तिल और गेहूं का भोग लगाएं
-
सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें
आदित्य हृदय स्तोत्र का प्रसिद्ध श्लोक:
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् ।
जयावहं जपं नित्यं अक्षय्यं परमं शिवम् ॥
🥣 इस दिन का भोग और दान
• गुड़-तिल के लड्डू
• खिचड़ी
• लाल वस्त्र
• तांबे का पात्र
• गेहूं और गुड़ का दान
दान से सूर्य कृपा प्राप्त होती है।
🔬 रथ सप्तमी का वैज्ञानिक महत्व
आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि इस समय सूर्य की किरणों में विशेष उपचारात्मक ऊर्जा होती है।
प्रातः सूर्य किरणों से शरीर में विटामिन D की पूर्ति होती है, जो हड्डियों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
🌺 रथ सप्तमी पर क्या करें
✔ सूर्योदय से पूर्व स्नान
✔ तांबे के पात्र से अर्घ्य
✔ आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ
✔ गुड़-तिल का सेवन
✔ जरूरतमंद को दान
❌ क्या न करें
✘ सूर्योदय के बाद देर तक सोना
✘ इस दिन नमक का अधिक सेवन
✘ अपवित्र मन से पूजा
🌞
रथ सप्तमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मशुद्धि का दिन है।
सूर्य देव की कृपा से जीवन में आरोग्य, तेज, सफलता और दीर्घायु प्राप्त होती है।
सूर्य देव की कृपा हम सभी पर बनी रहे।
ॐ सूर्याय नमः 🌞


