धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज का इतिहास | जीवन, पराक्रम और बलिदान

24 Views
8 Min Read
धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज
धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज

धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज

भारतीय इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें केवल उनके शासन के लिए नहीं, बल्कि उनके अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और सर्वोच्च बलिदान के लिए पूजा जाता है। महान मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र, छत्रपति संभाजी महाराज (शंभूराजे) एक ऐसे ही अद्वितीय शासक थे। मुगलों, पुर्तगालियों और जंजीरा के सिद्दियों से एक साथ लोहा लेने वाले संभाजी महाराज ने अपने 9 वर्ष के छोटे से शासनकाल में 120 से अधिक युद्ध लड़े और एक में भी पराजय का सामना नहीं किया

जन्म और प्रारंभिक जीवन की चुनौतियाँ

संभाजी महाराज का जन्म 14 मई 1657 को पुणे के पास पुरंदर किले में हुआ था। उनकी माता का नाम सईबाई और पिता छत्रपति शिवाजी महाराज थे। जब संभाजी मात्र दो वर्ष के थे, तब उनकी माता का देहांत हो गया। उनका पालन-पोषण उनकी वीर दादी, राजमाता जीजाबाई के मार्गदर्शन में हुआ, जिन्होंने उनके भीतर बचपन से ही राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान के बीज बो दिए थे।

छोटी सी उम्र में ही उन्हें राजनीति की कठोर वास्तविकताओं का सामना करना पड़ा:

  • पुरंदर की संधि (1665): जब शिवाजी महाराज और मुगल सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह के बीच पुरंदर की संधि हुई, तो मात्र 9 वर्ष की आयु में संभाजी महाराज को मुगलों के पास ‘मनसबदार’ (बंधक के रूप में) भेजा गया।
  • आगरा से ऐतिहासिक पलायन (1666): औरंगजेब ने जब शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज को आगरा में नजरबंद कर दिया था, तब शिवाजी महाराज की बुद्धिमानी से दोनों वहां से सुरक्षित बच निकले। उस समय 9 वर्षीय संभाजी ने मथुरा में अज्ञातवास के दौरान जो धैर्य दिखाया, वह उनकी मानसिक मजबूती का पहला प्रमाण था।

शास्त्र और शस्त्र दोनों के ज्ञाता

यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि संभाजी महाराज जितने खतरनाक योद्धा थे, उतने ही बड़े विद्वान भी थे। 14 वर्ष की आयु तक आते-आते वे 13 से अधिक भाषाओं के जानकार बन चुके थे, जिनमें संस्कृत, मराठी, हिंदी, ब्रज, उर्दू, अरबी और फारसी शामिल थीं।

उनका साहित्यिक योगदान भी अद्वितीय है:

  • बुधभूषणम्: मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने संस्कृत में इस ग्रंथ की रचना की। यह राजनीति, राज्य व्यवस्था और सैन्य रणनीतियों पर एक उत्कृष्ट कृति है।
  • अन्य रचनाएं: ब्रज और हिंदी भाषा में उन्होंने ‘नायिकाभेद’, ‘नखशिख’ और ‘सातसतक’ जैसे काव्यों की रचना की।

कन्नौज के प्रकांड विद्वान कवि कलश उनके सबसे करीबी मित्र और सलाहकार थे, जो अंत तक उनके साथ खड़े रहे।

राज्याभिषेक और मुगलों से सीधा टकराव

3 अप्रैल 1680 को छत्रपति शिवाजी महाराज के निधन के बाद, कुछ आंतरिक पारिवारिक राजनीतिक उथल-पुथल के बाद 16 जनवरी 1681 को संभाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक हुआ। उनके राजा बनते ही मराठा साम्राज्य को चारों ओर से शत्रुओं ने घेर लिया।

1682 में, मुगल सम्राट औरंगजेब खुद अपनी राजधानी छोड़कर 5 लाख की विशाल सेना, आधुनिक तोपखाने और अपार धन के साथ दक्षिण भारत (दक्कन) आ धमका। उसका लक्ष्य मराठा साम्राज्य को जड़ से खत्म करना था।

अजेय सैन्य अभियान और रणनीतिक कौशल

संभाजी महाराज का सैन्य कौशल इतना अचूक था कि उन्होंने कई मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ा:

  1. रामशेज किले का चमत्कार: औरंगजेब के सेनापति शहाबुद्दीन खान ने रामशेज किले पर हमला किया। मुगलों को लगा कि यह छोटा सा किला कुछ घंटों में गिर जाएगा, लेकिन संभाजी महाराज के नेतृत्व में मराठा सैनिकों ने 65 महीनों (साढ़े 5 साल) तक किले को मुगलों के हाथ नहीं लगने दिया। यह मुगल सेना के लिए एक करारी मनोवैज्ञानिक हार थी।
  2. पुर्तगालियों और सिद्दियों पर प्रहार: जंजीरा के सिद्दियों को रोकने के लिए संभाजी महाराज ने समुद्र में ‘पद्मदुर्ग’ नामक किला बनवाया। इसके अलावा, जब गोवा के पुर्तगालियों ने मराठों के खिलाफ मुगलों की मदद करनी चाही, तो शंभूराजे ने उन पर ऐसा भीषण आक्रमण किया कि पुर्तगाली गवर्नर को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा।
  3. छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare): उन्होंने अपने पिता की छापामार युद्ध नीति को और आक्रामक बना दिया। वे मुगलों के बड़े सैन्य शिविरों पर अचानक हमला करते और रसद लूट लेते, जिससे विशाल मुगल सेना भुखमरी और हताशा का शिकार होने लगी।

संगमेश्वर का छल और महाबलिदान

युद्ध के मैदान में संभाजी महाराज को हराना असंभव हो चुका था, इसलिए औरंगजेब ने छल और गद्दारी का सहारा लिया। फरवरी 1689 में, जब संभाजी महाराज और उनके मित्र कवि कलश रत्नागिरी के पास संगमेश्वर में थे, तब उनके साले गणोजी शिर्के (जिन्होंने जागीर न मिलने के कारण गद्दारी की) की गुप्त सूचना पर मुगल सेनापति मुकर्रब खान ने अचानक हमला कर उन्हें बंदी बना लिया।

उन्हें औरंगजेब के शिविर (बहादुरगढ़) में लाया गया। औरंगजेब ने उन्हें जीवनदान देने के लिए तीन शर्तें रखीं:

  1. मराठा साम्राज्य के सभी किले और क्षेत्र मुगलों को सौंप दें।
  2. मराठों का सारा गुप्त खजाना दे दें।
  3. अपना हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर लें।

संभाजी महाराज ने इन सभी शर्तों को निर्भीकता से ठुकरा दिया और औरंगजेब को मुँहतोड़ जवाब दिया। इसके बाद औरंगजेब ने उन पर पाशविक अत्याचारों की सारी हदें पार कर दीं। 40 दिनों तक उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं—गरम लोहे से उनकी आँखें फोड़ दी गईं, उनकी जीभ काट दी गई और एक-एक करके उनके शरीर के अंगों को काटा गया।

अंततः 11 मार्च 1689 (फाल्गुन अमावस्या) को पुणे के पास तुलापुर-वढू में उनकी हत्या कर दी गई। अपने धर्म और राष्ट्र के लिए इस असीम बलिदान के कारण ही उन्हें ‘धर्मवीर’ कहा जाता है।

औरंगजेब का स्वप्न भंग और मराठा स्वाधीनता संग्राम

औरंगजेब की यह सबसे बड़ी भूल थी कि उसने सोचा संभाजी महाराज  की मृत्यु से मराठे डर जाएंगे। इसके विपरीत, संभाजी महाराज के क्रूर वध ने पूरे महाराष्ट्र में देशभक्ति और प्रतिशोध की ऐसी ज्वाला भड़काई जो ‘मराठा स्वाधीनता संग्राम’ में बदल गई।

छत्रपति राजाराम, महारानी ताराबाई, संताजी घोरपड़े और धनाजी जाधव जैसे वीर सेनापतियों ने मुगलों को दक्कन में ही उलझाए रखा। जिस मराठा साम्राज्य को औरंगजेब खत्म करने आया था, उसी ने औरंगजेब के साम्राज्य की कब्र खोद दी और 1707 में औरंगजेब को महाराष्ट्र की मिट्टी में ही दफन होना पड़ा।


छत्रपति संभाजी महाराज का मात्र 32 वर्ष का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य, स्वाभिमान और धर्म के लिए बड़े से बड़ा बलिदान भी छोटा है। उनका शौर्य और त्याग भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जो अनंत काल तक युवाओं को प्रेरित करता रहेगा।

 

The short URL of the present article is: https://moonfires.com/bb34
Share This Article
Follow:
राज पिछले 20 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे हैं। इनको SEO और ब्लॉगिंग का अच्छा अनुभव है। इन्होने एंटरटेनमेंट, जीवनी, शिक्षा, टुटोरिअल, टेक्नोलॉजी, ऑनलाइन अर्निंग, ट्रेवलिंग, निबंध, करेंट अफेयर्स, सामान्य ज्ञान जैसे विविध विषयों पर कई बेहतरीन लेख लिखे हैं। इनके लेख बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं। Founder Of Moonfires.com
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Are you human? Please solve:Captcha