सुबह की प्रार्थना के १२ श्लोक
परिचय (हिंदी)
सनातन हिंदू परंपरा में प्रातःकाल को आत्मशुद्धि और ईश्वर-स्मरण का सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है।
सुबह का पहला विचार और पहला उच्चारण पूरे दिन की दिशा तय करता है।
इसी कारण शास्त्रों और परंपराओं में सुबह की प्रार्थना का विशेष महत्व बताया गया है।
सुबह पढ़े जाने वाले ये १२ पवित्र श्लोक केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं हैं,
बल्कि जीवन को अनुशासित, सकारात्मक और संतुलित बनाने का मार्ग हैं।
इन श्लोकों में कर्म, ज्ञान, कृतज्ञता, प्रकृति-पूजन और ईश्वर-समर्पण का गूढ़ दर्शन छिपा है।
इस लेख में हम सुबह की प्रार्थना के १२ श्लोक उनके
संस्कृत मूल तथा हिंदी, मराठी और English अर्थ के साथ विस्तार से समझेंगे।
प्रस्तावना (मराठी)
सनातन हिंदू परंपरेत सकाळचा काळ हा अत्यंत पवित्र आणि सकारात्मक मानला जातो.
सकाळी उठल्यानंतर मन शुद्ध, शांत आणि ग्रहणशील अवस्थेत असते.
याच वेळेस केलेली प्रार्थना आणि श्लोकपठण संपूर्ण दिवसाला योग्य दिशा देते.
ही सकाळची १२ प्रार्थना श्लोक केवळ धार्मिक विधी नसून,
जीवन जगण्याची एक शिस्त, सकारात्मक विचारांची बीजे आणि आत्मिक उन्नतीचा मार्ग आहेत.
या लेखात आपण सकाळच्या प्रार्थनेचे १२ श्लोक
त्यांच्या संस्कृत श्लोकांसह
आणि मराठी, हिंदी व English अर्थासह सविस्तरपणे पाहणार आहोत.
Introduction (English)
In Sanatan Hindu tradition, the early morning hours are considered the most sacred
for spiritual awakening and self-purification.
The thoughts we begin our day with shape our mindset, actions, and destiny throughout the day.
That is why morning prayers and shlokas hold a special place in daily life.
These 12 morning prayer shlokas are not mere religious verses;
they represent a complete philosophy of life — emphasizing gratitude, discipline,
respect for nature, devotion, and self-awareness.
In this article, we present 12 sacred morning shlokas
along with their original Sanskrit text
and detailed explanations in Hindi, Marathi, and English,
making them easy to understand and meaningful for every reader.
सनातन हिंदू परंपरा में प्रातःकाल को अत्यंत पवित्र माना गया है।
दिन की शुरुआत यदि शुद्ध विचारों, कृतज्ञता और ईश्वर-स्मरण से हो,
तो मन, बुद्धि और कर्म तीनों सही दिशा में प्रवाहित होते हैं।
इसी उद्देश्य से सुबह की प्रार्थना के श्लोक कहे जाते हैं।
ये श्लोक केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि जीवन-दर्शन,
अनुशासन और सकारात्मकता का स्रोत हैं।
यहाँ प्रस्तुत हैं सुबह की प्रार्थना के १२ प्रमुख श्लोक,
जिनका अर्थ हिंदी, मराठी और English में विस्तार से समझाया गया है।
1. कराग्रे वसते लक्ष्मीः
श्लोक (संस्कृत):
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥
हिंदी अर्थ:
हाथों के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल में भगवान गोविंद का वास है।
सुबह उठते ही अपने हाथों का दर्शन करना चाहिए।
मराठी अर्थ:
हातांच्या टोकाशी लक्ष्मी, मध्यभागी सरस्वती आणि मुळाशी गोविंद वास करतो।
म्हणून सकाळी उठल्यावर हातांचे दर्शन घ्यावे.
English Meaning:
At the tips of our hands resides Goddess Lakshmi, in the middle Goddess Saraswati,
and at the base Lord Govinda. Therefore, one should look at one’s hands at dawn.
व्याख्या:
यह श्लोक हमें सिखाता है कि हमारा कर्म ही हमारी संपत्ति है।
ज्ञान, समृद्धि और ईश्वर – तीनों हमारे हाथों से जुड़े हैं।
2. समुद्र वसने देवी
श्लोक (संस्कृत):
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥
हिंदी अर्थ:
हे पृथ्वी देवी! समुद्र तुम्हारा वस्त्र हैं, पर्वत तुम्हारे स्तन हैं।
हे विष्णु-पत्नी! मेरे पाँव के स्पर्श को क्षमा करें।
मराठी अर्थ:
हे पृथ्वीदेवी! समुद्र तुझे वस्त्र आहेत, पर्वत तुझे स्तन आहेत।
माझ्या पायांच्या स्पर्शाबद्दल क्षमा कर.
English Meaning:
O Earth Goddess, the oceans are your garments and mountains your bosom.
O consort of Lord Vishnu, forgive me for touching you with my feet.
व्याख्या:
यह श्लोक प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण चेतना का प्रतीक है।
3. गुरुर ब्रह्मा
श्लोक:
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
हिंदी: गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं। गुरु को परम ब्रह्म मानकर नमन।
मराठी: गुरु म्हणजेच ब्रह्मा, विष्णू आणि महेश. गुरुला साष्टांग नमस्कार।
English: The Guru embodies Brahma, Vishnu, and Shiva. Salutations to the Guru.
4. वक्रतुंड महाकाय
श्लोक:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ (संक्षेप):
हे गणेश! मेरे सभी कार्यों को निर्विघ्न बनाइए।
5. सरस्वति नमस्तुभ्यं
श्लोक:
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
व्याख्या:
यह श्लोक ज्ञान, स्मरणशक्ति और अध्ययन में सफलता के लिए है।
6. या कुन्देन्दु तुषारहार धवला
श्लोक:
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
सार:
माँ सरस्वती के शुद्ध, उज्ज्वल और शांत स्वरूप का ध्यान।
7. सर्वमङ्गल माङ्गल्ये
श्लोक:
सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥
अर्थ:
हे माँ दुर्गा! आप सभी मंगलों की मूल हैं।
8. शुभं करोति कल्याणम्
श्लोक:
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
व्याख्या:
यह दीप-प्रार्थना है – स्वास्थ्य, समृद्धि और सद्बुद्धि के लिए।
9. त्वमेव माता च पिता त्वमेव
श्लोक:
त्वमेव माता च पिता त्वमेव।
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव॥
भावार्थ:
ईश्वर ही सब कुछ हैं – माता, पिता, मित्र और सहारा।
10. कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा
श्लोक:
कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै नारायणाय इति समर्पयामि॥
व्याख्या:
अपने सभी कर्म ईश्वर को समर्पित करने की भावना।
11. ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु
श्लोक:
ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु।
सर्वेषां शान्तिर्भवतु॥
अर्थ:
सभी का कल्याण और शांति हो।
12. असतो मा सद्गमय
श्लोक:
असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
व्याख्या:
असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर।
सुबह की प्रार्थना के १२ श्लोक
ये सुबह की १२ प्रार्थनाएँ जीवन को अनुशासित, सकारात्मक और आध्यात्मिक बनाती हैं।
यदि प्रतिदिन इन्हें श्रद्धा से पढ़ा जाए, तो मन शांत, बुद्धि निर्मल और कर्म शुद्ध होते हैं।
चाहे भाषा हिंदी, मराठी या English हो – भाव एक ही है:
कृतज्ञता, करुणा और चेतना के साथ जीवन जीना।


